बस्तर के जंगल में गूंज रहा विदेशी मेहमानों का कलरव…….दुर्लभ पक्षियों का पहुंचना वहां के पर्यावरण की गुणवत्ता को दर्शाता है

बस्तर के जंगल सिर्फ हरियाली और जैव विविधता के लिए ही नहीं, बल्कि दूर-दराज देशों से आने वाले मेहमानों की मेजबानी के लिए भी जाने जाते हैं। इन दिनों यहां विदेशी पक्षियों का कलरव गूंज रहा है।दूर देशों से उड़कर आए पक्षियों ने यहां डेरा डालना शुरू कर दिया है। इनके आगमन को प्रकृति के बदलते मौसम और जंगलों की सेहत से जोड़कर देखा जाता है। अफ्रीका से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर दलपत सागर पहुंचा चातक पक्षी मानसून की आहट दे रहा है तो माचकोट के जंगल में दिखा दुर्लभ लार्ज-टेल्ड नाइटजार पक्षी प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।माना जाता है कि अफ्रीका से हिंद महासागर को पार करते हुए आने वाला यह पक्षी मानसून का अग्रदूत होता है। वहीं माचकोट के जंगलों में दुर्लभ लार्ज-टेल्ड नाइटजार की मौजूदगी ने पक्षी प्रेमियों का उत्साह बढ़ा दिया है। दिन में पेड़ों और सूखी पत्तियों के बीच खुद को छिपाकर रखने वाला यह पक्षी कम ही दिखाई देता है। इसकी दुर्लभ झलक मिलना जंगल की समृद्ध जैव विविधता का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी क्षेत्र में प्रवासी और दुर्लभ पक्षियों का पहुंचना वहां के पर्यावरण की गुणवत्ता को दर्शाता है। खास मेहमानों को संगत देने के लिए लोकल पक्षी भी अपना डेरा सजाए हुए दिखाई दे रहे हैं। इनमें प्रमुख रुप से एमेरल्ड डव, जंगली मुर्गा, पहाड़ी मैना, इंडियन पित्ता, मालाबार ट्रोगन, ब्लैक नैप्ड ओरियोल शामिल हैं।