छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान के बाद अब जिलाध्यक्षों की भी परीक्षा शुरू होने वाली है l जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हुई, ट्रेनिंग हुई, सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने का मंत्र दिया गया और अब बारी है कामकाज के रिपोर्ट कार्ड की l कांग्रेस कनेक्ट सेंटर के जरिए जिलाध्यक्षों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है l छह महीने के कामकाज का आकलन होगा तथा संगठनात्मक सक्रियता देखी जाएगी l जनहित के मुद्दों पर प्रदर्शन देखा जाएगा और जरूरत पड़ी तो रैंकिंग भी होगी l यानी कांग्रेस में अब सवाल ये नहीं कि जिलाध्यक्ष कौन है सवाल ये है कि कौन काम कितना कर रहा है l
संगठन सृजन अभियान, कांग्रेस का संगठन मजबूत करने का अभियान, जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हुई, बड़े नेताओं ने ट्रेनिंग दी और अब कांग्रेस ने जिलाध्यक्षों के कामकाज की निगरानी का अगला प्लान भी तैयार कर लिया है l कांग्रेस कनेक्ट सेंटर के जरिए जिलाध्यक्षों की गतिविधियों का आकलन होगा औऱ संगठनात्मक गतिविधियां कितनी हुईं जनहित के मुद्दों पर जिलाध्यक्ष कितने सक्रिय रहे तथा
वरिष्ठ नेताओं और अलग-अलग कमेटियों के साथ तालमेल कैसा रहा? इन तमाम बिंदुओं पर नजर रखी जाएगी l यानी अब कांग्रेस के जिलाध्यक्षों के सामने सिर्फ कुर्सी नहीं, कसौटी भी होगी. छह महीने के कामकाज का आकलन होगा l किस जिले में संगठन मजबूत हुआ, कहां कार्यकर्ता सड़क पर उतरे, कहां जनता के मुद्दे उठे और कहां संगठन सिर्फ बैठकों तक सीमित रहा इन सबका हिसाब तैयार होगा l हालांकि अभी समीक्षा की तारीख तय नहीं हुई है l सियासत में सवाल अब सिर्फ जिलाध्यक्षों की रैंकिंग का नहीं है. सवाल ये है कि कांग्रेस संगठन को रैंकिंग से जमीन पर कितनी ताकत मिलेगी?अब देखना होगा कि कांग्रेस का ये रिपोर्ट कार्ड मॉडल 2028 की चुनावी जमीन पर कितना असर डालता है l
