रायगढ़ । धर्मादा ट्रस्ट की आड़ में शासन क़ो लाखों रुपय के टैक्स का चुना लगाया जा रहा है l सेठ किरोड़ीमल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा अपनी संपत्तियों के मूल स्वरूप को बदला जा चुका है औऱ संपत्तियों का आवासीय और व्यावसायिक उपयोग कर हर महीने लाखों की कमाई की जा रही है।
सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट के संपत्तियों की जांच शुरू हो चुकी है। संपत्तियों के मूल स्वरूप को बदला जा चुका है। जो दुकान 200 वर्गफुट की थी, 300 वर्गफुट की हो चुकी है। सामने सडक़ को भी दुकान में मिला लिया गया है। जो मकान दो कमरे का था, वह अब तीन मंजिला इमारत बन गई है। जहां धर्मशाला थी, वहां होटल, शोरूम खुल चुके हैं। ट्रस्ट की संपत्तियों को नियमों के दायरे में उपयोग करने की जिम्मेदारी पदाधिकारियों की थी, जिसमें वे नाकाम रहे। अब हालात ऐसे हैं कि सारी संपत्तियां मॉडिफाई हो चुकी हैं। ट्रस्ट पंजीकरण अधिकारी को बिना सूचना दिए संपत्तियों का अंतरण होता रहा। एक स्टाम्प पेपर पर लिखकर दुकानें और मकान एक व्यक्ति से दूसरे को दी जाती रही। नियमानुसार प्रतिवर्ष संपत्तियों की अद्यतन जानकारी और ऑडिट रिपोर्ट एसडीएम के पास जमा करना होता है, लेकिन सेठ किरोड़ीमल चैरिटेबल ट्रस्ट के संबंध में जानकारी एसडीएम को भी नहीं दी गई। हर साल की ऑडिट रिपोर्ट ही नहीं है। संपत्तियों की सूची में किरोड़ीमल कॉलोनी के करीब 65 मकान भी हैं। उनके आवंटियों के नाम अपडेट नहीं किए गए हैं। संपत्ति का वर्तमान स्वरूप और क्षेत्रफल भी बदल चुका है। इन 65 मकानों में कई बहुमंजिला इमारतों में बदल चुकी हैं। ट्रस्ट ने जिनको किराए पर मकान दिया था, उन्होंने इसे किसी और को किराए पर दे दिया। ट्रस्ट नाममात्र का किराया लेता है लेकिन मकान से हजारों रुपए प्रतिमाह प्राप्ति हो रही है।
ढूंढ़ रहे हैं ऑडिट रिपोर्ट
सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट के संपत्तियों की जांच कई स्तरों पर चल रही है। ट्रस्ट के पंजीयन नियमों के मुताबिक कार्रवाई हो रही है। नियमों के मुताबिक टैक्स का भी निर्धारण होगा। इस बीच ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्ट भी खोजी जा रही है। हर साल के रिपोर्ट को जांचा जाएगा।
