शिक्षा के अधिकार क़ानून के तहत गरीब विद्यार्थियों को निजी स्कूल में निःशुल्क शिक्षा दिये जाने का प्रावधान है l वहीं छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैंनेजमेंट एसोसिएशन ने इस साल RTE के तहत एडमिशन नहीं देने का निर्णय लिया है l निजी स्कूलों के इस फैसले से गरीब और वंचित बच्चों की पढ़ाई पर संकट खड़ा हो गया है l बताया जा रहा है कि आरटीई की कम प्रतिपूर्ति राशि से नाराज़ स्कूल प्रबंधन पिछले कई सालों से राशि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं l शासन द्वारा राशि नहीं बढ़ाये जाने पर यह बड़ा फैसला लिया गया है l इस मामले को लेकर प्रदेश में प्राइवेट स्कूल और सरकार के बीच विवाद तेज हो गया है l एसोसिएशन द्वारा सरकार पर हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने का भी आरोप लगाया गया है तथा मांग पूरी होने तक असहयोग आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है l एसोसिएशन द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि RTE क़ानून वर्ष 2011 से लागू हुआ है तब से आज पर्यन्त राशि में कोई वृद्धि नहीं की गई है l संगठन द्वारा वर्ष 2016 से राशि बढ़ाने की मांग की जा रही है l संगठन की मांग की अनदेखी करने पर उनके द्वारा जुलाई 2025 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी जिस पर हाई कोर्ट ने 6 माह के भीतर संगठन द्वारा दी गई रिप्रजेटेंशन पर निर्णय हेतु आदेशित किया था l कोर्ट के आदेश पर विचार करने शिक्षा विभाग लगातार पत्र देकर निवेदन किया जा रहा है l विभाग द्वारा उनकी मांग की अनदेखी की जा रही है जिसके विरोध में संगठन की ओर से असहयोग आंदोलन का निर्णय लिया गया है l वहीं दुसरी ओर छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों को राज्य सरकार ने सख्त निर्देश जारी करते हुए RTE के तहत एडमिशन शुरू करने कहा है l वहीं शासन की ओर से RTE में एडमिशन न देने पर निजी स्कूलों की मान्यता रद्द किये जाने की बात भी कही गई है l राज्य सरकार ने कहा कि RTE प्रतिपूर्ति राशि कई दूसरे राज्यों से बेहतर है l