raigarh । पुलिस ने बड़ी सफलता प्राप्त करते हुए एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है, जो अपने गिरोह के साथ मिलकर विभिन्न सटोरियों को क्रिकेट सट्टा आईडी उपलब्ध कराता था तथा उन्हें तकनीकी सहायता प्रदान करता था। आरोपी द्वारा सट्टेबाजों को अधिक लाभ दिलाने के उद्देश्य से ऐसी वेबसाइट एवं आईडी तैयार कर बेची जा रही थी, जिसमें लाइव क्रिकेट मैच का प्रसारण टेलीविजन प्रसारण से लगभग पांच सेकेंड पहले उपलब्ध हो जाता था, जिसका उपयोग कर सटोरिये बॉल-टू-बॉल सट्टेबाजी में अनुचित लाभ प्राप्त कर रहे थे।
साइबर पुलिस टीम द्वारा पूर्व में रायगढ़ सहित कोलकाता एवं गोवा तक फैले सट्टा नेटवर्क के विरुद्ध सिलसिलेवार कार्रवाई की जा चुकी है। एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन पर सीएसपी मयंक मिश्रा द्वारा पूरे सिंडीकेड के लिंक से जुड़े व्यक्तियों की जांच की जा रही है । इसी दौरान पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि न्यू शंकरनगर रायगढ़ में एक व्यक्ति अपने घर से कंप्यूटर एवं विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा के लिए आईडी बनाकर बेच रहा है। सूचना पर थाना प्रभारी साइबर निरीक्षक विजय चेलक के नेतृत्व में साइबर थाना टीम ने न्यू शंकरनगर रायगढ़ क्षेत्र में दबिश दी। पुलिस को देखकर एक युवक भागने का प्रयास करने लगा, जिसे घेराबंदी कर पकड़ा गया। पूछताछ में उसने अपना नाम आदर्श कुमार केशरी पिता प्रदीप कुमार केशरी, उम्र 28 वर्ष, निवासी न्यू शंकरनगर, शीतला मंदिर के पास, कोतरारोड बताया। जांच के दौरान आरोपी के कब्जे से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालन एवं आईडी निर्माण से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्राप्त हुए। पूछताछ में आरोपी ने अपने साथियों एवं पूरे नेटवर्क के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि वह बी.टेक इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है तथा वर्तमान में दिल्ली स्थित एक आईटी कंपनी में कार्यरत है। अक्टूबर 2025 में उसकी मुलाकात रायपुर निवासी एवं बिहार निवासी दो मित्रों से हुई, जो नोएडा स्थित आईटी कंपनियों में कार्यरत हैं। इनके माध्यम से वह ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क से जुड़ा तथा Winbigpro नामक प्लेटफॉर्म के संचालन और तकनीकी प्रबंधन का कार्य करने लगा, जिसके बदले उसे 20 प्रतिशत कमीशन प्राप्त होता था।आरोपी एवं उसके साथियों द्वारा क्रिकेट मैचों के प्रसारण में मौजूद तकनीकी विलंब का अध्ययन कर ऐसी वेबसाइट विकसित की गई, जिसमें मैच की जानकारी सामान्य टीवी प्रसारण से लगभग पांच सेकेंड पहले दिखाई देती थी। इसी विशेषता के कारण सट्टेबाजों को बॉल-टू-बॉल सट्टे में बढ़त मिलती थी। आरोपी ने बताया कि गिरोह द्वारा क्रिकेट सट्टा में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न डोमेन एवं वेबसाइटों का अध्ययन कर उनसे मिलते-जुलते प्लेटफॉर्म तैयार किए जाते थे तथा देश के विभिन्न महानगरों सहित रायपुर, भिलाई एवं बिलासपुर के सटोरियों को आईडी उपलब्ध कराई जाती थी। पुलिस से बचने के लिए समय-समय पर वेबसाइट का नाम, यूजर आईडी और पासवर्ड भी बदले जाते थे। इनके सिंडिकेट में सोशल मीडिया में पोस्ट डालने, आईडी बेचने और वेब साइड क्रिएअट करने और भी अलग-अलग लोगों की टीम बनाकर रखे हुये थे ।आरोपी ने पूछताछ में यह भी बताया कि वह केवल सट्टा आईडी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं था बल्कि सटोरियों के भुगतान एवं विड्रॉल संबंधी कार्यों में भी सहयोग करता था।
