वर्ष 2003 में राजधानी रायपुर में हुए बहुचर्चित कत्ल के मामले की फाईल 23 साल बाद एक बार फिर खुलने जा रही है l इस राजनीतिक हत्या ने न केवल रायपुर में बल्कि पुरे छत्तीसगढ़ में हड़कंप मचा दी थी l मामले में सी बी आई जांच भी हुई थी l अब 23 साल बाद एक परिवार को न्याय पाने की “उम्मीद” है l दरअसल यह उम्मीद नहीं बल्कि उस सिस्टम पर सबसे बड़ा इल्ज़ाम है जो वक्त पर न्याय नहीं दे पाया l और दूसरी तरफ वो नाम जो बरी हो चुका है लेकिन अब फिर उसी केस में खड़ा है यानि या तो पहले सच कमजोर था या फिर सच को कमजोर किया गया था l इस हाइ प्रोफ़ाइल हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी का भी आरोपियों के साथ नाम जुड़ा था l जी हां हम यहां बात कर रहे हैं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी हत्याकांड की l
4जून 2003 को एनसीपी के प्रदेश कोषाध्यक्ष रहे रामावतार जग्गी की सरे आम गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी l हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी का नाम भी शामिल था जिससे मामले की जांच सीबीआई को सौपी गई थी l सीबीआई ने 31 लोगों को इसमें आरोपी बनाया था जिसमें से कुछ आरोपियों को दोषी करार दिया गया लेकिन जैसे ही कहानी बड़े नाम तक पहुंची सिस्टम की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई l वहीं वर्ष 2007 में अमित जोगी को उनके खिलाफ सबूत नहीं मिलने की बात कहते हुए न्यायालय ने इस मामले में बरी कर दिया था l वहीं इसके बाद इस केस की फाईल बंद हो गई थी लेकिन 23 साल बाद एक बार फिर राम अवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले पर नये सिरे से जांच की मांग की है जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है तथा आने वाले 1 अप्रैल को फ़ाइल पर सुनवाई होनी है l 23 साल में सरकारें बदलीं, चेहरे बदले,लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो वो है…न्याय की रफ्तार और सिस्टम की खामोशी l यह केस अब हत्या का नहीं बल्कि उस सच्चाई का केस है जिसे हर बार या तो कमजोर किया गया या फिर टाल दिया गया l

