छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर गौवंश केंद्र में आ गया है l कभी कांग्रेस की गोधन न्याय योजना सियासी मॉडल बताई जाती थी, तो अब बीजेपी सरकार गौधाम योजना के जरिए नई शुरुआत का दावा कर रही है. लेकिन सवाल वही पुराना है क्या गाय सच में सियासत से बाहर निकलकर ज़मीन पर सुरक्षित होगी, या फिर यह भी सिर्फ़ राजनीतिक नारों तक सीमित रह जाएगा l
छत्तीसगढ़ में आज से होगी गौधाम योजना की शुरुआत जिसके तहत अलग-अलग जिलों और ब्लॉकों में गौधाम/गौशाला बनाए जाएंगे l गौ धाम में आवारा और जब्त किए गए पशुओं को रखा जाएगा l पशुओं के रहने के लिए सुरक्षित शेड, साफ-सफाई, मेडिकल और पानी की व्यवस्था होगी तथा गायों के लिए नियमित चारा, भूसा और हरा चारा उपलब्ध कराया जाएगा l वहीं समय-समय पर टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच होगी l प्रदेश में प्रत्येक विकासखण्ड में 10 गौधाम तथा पूरे राज्य में 1460 गौधाम बनेंगे ल वर्तमान में 36 गौ धामों की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है तथा 116 गौ धामों की प्रशासकीय स्वीकृति प्रक्रियाधीन है l प्रदेश में प्रथम चरण में कुल 152 गौ धामों की स्थापना की जा रही है l
छत्तीसगढ़ में गौवंश संरक्षण को लेकर नई पहल शुरू होने जा रही है l मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बिलासपुर जिले के तखतपुर के लाखासार से गौधाम योजना का शुभारंभ करेंगे l इस योजना का मुख्य उद्देश्य आवारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय देना और अवैध तस्करी पर अंकुश लगाना बताया जा रहा है. सरकार के मुताबिक तस्करी विरोधी अभियानों के दौरान पुलिस द्वारा जब्त की गई गायों को भी गौधाम में रखा जाएगा. राज्य के कृषि मंत्री रामविचार नेताम का कहना है कि बीजेपी सरकार ने गौवंश की समस्याओं के समाधान के लिए बजटीय व्यवस्था की है l उनका आरोप है कि पिछली सरकार की गोधन न्याय योजना केवल कागजों तक सीमित रही l मंत्री रामविचार नेताम के मुताबिक सरकार हर एक पशु की गणना कर उसके लिए बेहतर व्यवस्था तय करेगी l वहीं
सियासत में सवाल भी उतनी ही तेजी से उठ रहे हैं जितनी तेजी से दावे किए जा रहे हैं l विपक्ष तंज कस रहा है कि जिस प्रदेश में गौठानों की हालत पहले ही सवालों के घेरे में है, वहां नई योजना कितनी जमीन पकड़ पाएगी l आरोप ये भी है कि सत्ता बदलते ही योजनाएं बदल जाती हैं, लेकिन सड़कों पर घूमता गौवंश नहीं बदलता l यानी नाम बदलते हैं, बोर्ड बदलते हैं, मगर तस्वीर वही रहती है l
छत्तीसगढ़ में गाय अब सिर्फ़ खेत और खलिहान की नहीं, बल्कि सियासत की भी सबसे बड़ी किरदार बन चुकी है l कांग्रेस का गोधन मॉडल अब इतिहास बनता दिख रहा है, और बीजेपी गौधाम मॉडल के जरिए नई कहानी लिखने का दावा कर रही है, लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि यह कहानी कागज़ और घोषणाओं से निकलकर ज़मीन तक पहुंचती है या फिर गाय के नाम पर सियासत का सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा l