रायगढ़। धरमजयगढ़ क्षेत्र में दुर्गापुर खुली खदान परियोजना को लेकर कलेक्ट्रेट में जिला स्तरीय पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में परियोजना से प्रभावित होने वाले गांवों के पुनर्वास, मुआवजा, रोजगार और विस्थापित परिवारों की सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया और अपनी समस्याएं तथा मांगें समिति के समक्ष रखीं।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित दुर्गापुर खुली खदान परियोजना की उत्पादन क्षमता 10 मिलियन टन प्रतिवर्ष निर्धारित है। इस परियोजना के लिए दुर्गापुर, शाहपुर, धरमजयगढ़, धरमजयगढ़ कॉलोनी, तराईमार, बायसी और बायसी कॉलोनी सहित कुल सात गांवों की लगभग 1595 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है। इनमें से चार गांवों में मकानों का अधिग्रहण और विस्थापन प्रस्तावित है, जिससे लगभग 2830 परिवार प्रभावित होंगे। बैठक में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, उचित मुआवजा, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं को लेकर विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा की गई। योजना के अनुसार पात्र भू-स्वामियों को प्रति दो एकड़ भूमि पर एक स्थायी नौकरी अथवा नौकरी के बदले निर्धारित मुआवजा देने का प्रावधान है। वहीं विस्थापित परिवारों को विकसित पुनर्वास स्थल पर छह डिसमिल भूखंड के साथ सडक़, बिजली, पानी, स्कूल, आंगनबाड़ी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई। हालांकि बैठक के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें अब तक उचित और संतोषजनक मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जब तक उनकी मांगों के अनुरूप उचित मुआवजा और सभी सुविधाओं की स्पष्ट गारंटी नहीं दी जाती, तब तक वे अपनी भूमि देने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय की मांग की है।