raigarh l विगत दिनों पकड़े गए अंतरराज्यीय लकड़ी तस्करी गिरोह की परतें अब लगातार खुल रही हैं। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि तस्करी का यह कोई छोटा-मोटा खेल नहीं बल्कि बाकायदा ऑर्गेनाइज्ड क्राइम का सिंडिकेट था। गिरोह का सरगना सरसीवा का मूल निवासी मनीष अग्रवाल ही है जो अपने साथी रोहित मित्तल और सलाउद्दीन खान सहित पूरे सिंडिकेट के साथ इस पूरे गिरोह को ऑपरेट करता था। जंगलों में पेड़ कटवाने से लेकर लकड़ी की प्रोसेसिंग, फर्जी टीपी और दूसरे राज्यों तक सप्लाई की पूरी चेन तैयार थी। अब पुलिस की नजर सिर्फ तस्करी पर नहीं, बल्कि इस काले कारोबार में लगे पैसों और पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने पर है।
रायगढ़ में पकड़े गए लकड़ी तस्करों से पूछताछ में पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लगे हैं। तीनों आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस इस पूरे नेटवर्क की एंड-टू-एंड इन्वेस्टिगेशन में जुट गई है। जांच में ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के संकेत मिलने के बाद बीएनएस की धारा 111 भी जोड़ी गई है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि सिंडिकेट का सरगना मनीष अग्रवाल लंबे समय से लकड़ियों की तस्करी कर रहा था। उसके साथ रायगढ़ निवासी रोहित मित्तल और सलाउद्दीन खान भी इस मामले में आरोपी हैं। पुलिस के मुताबिक गिरोह ने तस्करी के लिए पूरा सिस्टम बना रखा था। एक गुट मजदूरों के जरिए जंगलों में कटाई करवाता था, दूसरा रात के अंधेरे में लकड़ियां जंगल से निकालकर गोदाम तक पहुंचाता था। गोदाम पहुंचने के बाद लकड़ियों की प्रोसेसिंग होती थी और फिर फर्जी टीपी के जरिए इन्हें सुरक्षित रास्तों से दूसरे राज्यों तक भेजा जाता था। छत्तीसगढ़ से निकलने वाली ये लकड़ियां मध्य प्रदेश के रास्ते उत्तर प्रदेश, हरियाणा और फिर हिमाचल प्रदेश तक पहुंचाई जाती थीं। गिरोह की खास दिलचस्पी महंगी खैर और तेंदू की लकड़ियों में थी। पुलिस अब उन गोदामों और फैक्ट्रियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जहां तस्करी की लकड़ियां खपाई जाती थीं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग ट्रांसपोर्टेशन, प्रोसेसिंग और फर्जी दस्तावेजों का इंतजाम करते थे। पुलिस जांच की अब सबसे अहम कड़ी पैसों का नेटवर्क है। पुलिस को यह पता लगाना है तस्करी के करोड़ों रुपए कहां-कहां निवेश और कहां छुपाये गए हैं। पुलिस मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी में है।
