रायगढ़ । तमनार के CHP चौक लिबरा हिंसा मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी अनिल बेहरा निवासी ग्राम लिबरा को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। आरोपी पुलिस बल पर प्राणघातक हमला, लूटपाट, आगजनी, बलवा एवं शासकीय कार्य में बाधा सहित गंभीर अपराधों में नामजद था।
जानकारी के अनुसार गारे पेलमा सेक्टर-01 कोयला परियोजना की जनसुनवाई के विरोध में दिसंबर 2025 से लिबरा स्थित CHP चौक पर प्रभावित गांवों के लोगों द्वारा धरना-प्रदर्शन एवं आर्थिक नाकेबंदी की जा रही थी। प्रशासन एवं पुलिस द्वारा लगातार आंदोलनकारियों को शांति बनाए रखने तथा कानून व्यवस्था का पालन करने की समझाइश दी जा रही थी। 27 दिसंबर 2025 को कानून व्यवस्था ड्यूटी के दौरान आंदोलन अचानक उग्र हो गया। आरोप है कि राजेश मरकाम, अनिल बेहरा, रूपेश पटेल, संदीप प्रधान सहित अन्य लोगों द्वारा आंदोलनकारियों को उकसाकर पुलिस बल पर लाठी, डंडा, टांगी एवं पत्थरों से हमला किया गया। घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हुए। इस दौरान पुलिस से शासकीय वॉकी-टॉकी एवं शासकीय मोबाइल फोन भी लूट लिया गया।
उग्र भीड़ द्वारा पुलिस दल को घेरकर लगातार पथराव किया गया। सड़क किनारे खड़े पुलिस के शासकीय वाहनों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के वाहनों में तोड़फोड़ कर आग लगा दी गई। इसके साथ ही प्लांट परिसर में भी तोड़फोड़ की गई, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई।
घटना के संबंध में अलग-अलग प्रार्थियों की रिपोर्ट पर थाना तमनार में कुल 16 अपराध पंजीबद्ध किए गए हैं। प्रकरण में अब तक 29 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा चुका है जबकि अन्य फरार आरोपियों की पतासाजी एवं गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपी अनिल बेहरा पिता प्रेमसागर बेहरा, उम्र 37 वर्ष, निवासी लिबरा, थाना तमनार, जिला रायगढ़ थाना तमनार में दर्ज अपराध में नामजद आरोपी था। विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा उसकी लगातार तलाश की जा रही थी। मंगलवार को पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि आरोपी अनिल बेहरा अपने गांव लिबरा आया हुआ है। सूचना पर तमनार एवं पूंजीपथरा पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा तत्काल घेराबंदी कर आरोपी को हिरासत में लिया गया।विवेचना में आंदोलनकारियों को दुष्प्रेरित करने की भूमिका सामने आने पर प्रकरण में धारा 49 बीएनएस एवं धारा 25 आर्म्स एक्ट जोड़ी गई। आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
