adv आरोग्य धनवर्षा चिटफंड कंपनी के चार डायरेक्टर धोखाधड़ी मामले में दोषी पाये गये

raigarh । एडीवी आरोग्य धनवर्षा नाम से संचालित चिटफंड कंपनी द्वारा अन्य बैंकों से ज्यादा ब्याज देने का प्रलोभन देते हुए निवेशकों से लाखों रूपए जमा कराने के बाद राशि गबन करने के मामले में कंपनी के चार डायरेक्टरों को कोर्ट ने धोखाधड़ी का दोषी पाते हुए 6 साल के सश्रम कारावास सहित 60 लाख रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। वहीं अर्थदण्ड की राशि से निवेशकों के पैसे लौटाने का निर्देश दिया है। उक्त प्रकरण सिटी कोतवाली थाने में दर्ज किया गया था।
मिली जानकारी के अनुसार 6 अगस्त 2019 को मीनकेतन पटेल ने सिटी कोतवाली में लिखित रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उसके पहचान का दिलीप साहू वर्ष 2013 में उसे बताया कि रघुवीर सिंह राठौर, जगदीश चन्द्र व्यास, धर्मेन्द्र सिंह सोनगरा, राजेन्द्र सिंह सिसोदिया एडीवी आरोग्य धनवर्षा कंपनी के मालिक हैं तथा इनकी कंपनी अन्य बैंकों से ज्यादा ब्याज देती है। साढ़े पांच साल में रकम दुगुनी लौटाई जाती है। उसकी बात में आकर मीनकेतन पटेल ने कंपनी के इतवारी बाजार स्थित कार्यालय में 8 किश्तों में कुल 3 लाख 28 हजार रूपए जमा कराया था। इसके अलावे उसके गांव के अन्य लोगों ने भी लाखों रुपय की राशि जमा की थी l वहीं वर्ष 2017 मेें उक्त चारों डायरेक्टर कार्यालय बंद कर फरार हो गये थे। मीनकेतन पटेल सहित अन्य लोगों के आवेदन पर कोतवाली पुलिस ने कंपनी के चारों डॉयरेक्टरों के विरूद्ध भादंवि की धारा 420, 34 एवं छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों का सरंक्षण अधिनियम 2005 की धारा 6 (5) के तहत अपराध पंजीबद्ध करते हुए उनकी पतासाजी प्रारंभ की। वहीं कंपनी के दस्तावेजों की जांच करवाई गई, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक, कंपनी रजिस्ट्रार बिलासपुर द्वारा जानकारी दी गई कि कपंनी रजिस्ट्रार मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ द्वारा पंजीयन प्रमाण पत्र एवं कंपनी का आर्टिकल ऑफ एसोसियेशन प्रदाय किया गया है, जिसके अनुसार रघुवीर सिंह राठौर, जगदीश चन्द्र व्यास, धर्मेन्द्र सिंह सोनगरा, राजेन्द्र सिंह सिसोदिया, भूपेन्द्र सिंह हैंडा, महमूद हुसैन मंसूरी, अजय प्रताप फिराज खान, बगड़ीराम देवड़ा को उक्त कंपनी का डायरेक्टर होना बताया गया है। वहीं पुलिस ने रघुवीर सिंह राठौर, जगदीश चन्द्र व्यास, धर्मेन्द्र सिंह सोनगरा, राजेन्द्र सिंह सिसोदिया की पतासाजी करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। वहीं विशेष न्यायाधीश जितेन्द्र कुमार जैन ने उभय पक्ष की सुनवाई करते हुए प्रस्तुत किये गये गवाह एवं साक्ष्य के आधार पर यह पाया कि 30 नवंबर 2013 से 30 जून 2015 के बीच राशि जमा कराने एवं कंपनी बंद कर गबन किया गया है। चूंकि छत्तीसगढ़ निवेशकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 23 जुलाई 2015 से लागू हुआ है लिहाजा जिस अवधि में अपराध होना बताया गया है उस अवधि में अधिनियम लागू नहीं हुआ था, इसलिए आरोपीगण के विरूद्ध उक्त अधिनियम से संबंधित अपराध प्रमाणित नहीं होता है। इस वजह से उक्त अधिनियम के आरोप से उन्हें बरी कर दिया गया। वहीं स्कीम की मैच्योरिटी पूर्ण होने के पूर्व कंपनी बंद कर निवेशकों के साथ छल करते हुए फरार होने के कारण आरोपियों को भादंवि की धारा 420, 34 के अपराध के लिए दोषी करार देते हुए 6 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 60 लाख रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। वहीं अपील समय अवधि बाद अर्थदण्ड की राशि से निवेशकों की रकम लौटाने का निर्देश भी दिया गया है।