छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की हड़ताल ने निगम की कार्यप्रणाली की वास्तविकता उजागर कर दी है। कुछ दिनों की हड़ताल ने यह साबित कर दिया है कि बीज निगम का अधिकांश कार्य दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के भरोसे ही संचालित होता है। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद प्रदेशभर के कई कार्यालयों में ताले लटकने की स्थिति बन गई है, जबकि स्थायी कर्मचारी व्यवस्था को संभालने में पूरी तरह असफल नजर आ रहे हैं।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर 30 अप्रैल 2026 को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की थी। इसके बाद 1 मई से 4 मई तक कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं होने पर 5 मई से राजधानी रायपुर के तुता धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी गई, जो लगातार जारी है।
हड़ताल का सीधा असर बीज निगम के जमीनी कार्यों पर पड़ा है। बीज भंडारण, रखरखाव, लोडिंग-अनलोडिंग, बीज परिवहन और किसानों तक बीज पहुंचाने की प्रक्रिया लगभग ठप हो चुकी है। कई जिलों के गोदामों में काम बंद है और कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
कर्मचारियों का कहना है कि निगम में स्थायी अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है। कई महत्वपूर्ण पद कृषि विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों द्वारा संभाले जा रहे हैं। इसके बावजूद वर्षों से निगम का पूरा जमीनी कार्य दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी ही करते आ रहे हैं, लेकिन उनके योगदान को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
कर्मचारियों की पहली मांग अगस्त 2023 से मार्च 2024 तक लंबित श्रम सम्मान निधि की राशि जारी करने की है। वहीं दूसरी मांग आकस्मिक मृत्यु होने पर कर्मचारी के परिवार को 50 हजार रुपए अंतिम संस्कार सहायता राशि देने की है। संघ ने स्वर्गीय विनय कुमार निर्मलकर के परिवार को तत्काल सहायता राशि देने की मांग भी उठाई है।
हड़ताली कर्मचारियों ने निगम के प्रबंध संचालक पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। भुगतान रोके जाने के संबंध में जानकारी मांगने पर भी प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उनका कहना है कि वर्तमान हड़ताल ने साफ कर दिया है कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के बिना बीज निगम का संचालन संभव नहीं है।

